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तुगलकाबाद का किला

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गयासुद्दीन तुगलक (1321-25) ने किलेबंदी वाले तुगलकाबाद नगर का निर्माण करवाया था जो दिल्ली का तीसरा नगर था। प्रकृति की गोद में निर्जन पहाड़ियों पर खड़ी भूरे अनगढ़ पत्थरों की टूटी दीवारों वाले तुगलकाबाद को वास्तुशिल्प की दृष्‍टि से एक दुर्ग के रूप में स्थापित किया गया था। यह किला दो भागों में बंटा है- दक्षिणी दीवारों के साथ-साथ नगर दुर्ग और महल इसका एक भाग है और इसके उत्तर में बसा नगर दूसरा भाग है। नक्शे के अनुसार यह 6 कि.मी. की किलेबंदी सहित एक अनियमित आयत है। नगर दुर्ग अभी भी अखंड खड़ा है और महल की दीवारों की अभी भी पहचान की जा सकती है। हालांकि नगर का भाग अत्यधिक ध्वस्त हो चुका है फिर भी इसकी कुछ गलियों को एक सीध में देखा जा सकता है।

दक्षिण में, तुगलकाबाद के मुख्य प्रवेश द्वार के पार गयासुद्दीन तुगलक का मकबरा है। इसका अग्रभाग लाल बलुआ पत्थरों से बना है जिसे संगमरमर द्वारा उभारा गया है। यह ऊंची दीवारों से घिरा है जो एक अनियमित पंचभुज बनाती हैं। तीन ओर इसके चापाकार दरवाजों के भीतरी भाग में ‘नुकीले झब्बे’ लगे होने और इसकी रंग योजना के बावजूद भी इसमें खालजी काल की वास्तुकला की कुछ विशेषताएं देखने को मिलती हैं। लेकिन शीर्ष पर एस के आकार के मोड वाला इसका मेहराब, ‘टूडर’ मेहराब- एक हल्के से नुकीले ‘टार्टर’ गुम्बद की याद दिलाता है और दरवाजों के लिए बीम और मेहराब का इस्तेमाल इसकी खूबी है। मूल रूप में यह एक कृत्रिम जलाशय में खड़ा था और एक पक्के नदी पथ द्वारा तुगलकाबाद से जुड़ा हुआ था जो अब कुतुब-बदरपुर रोड़ द्वारा भेद दिया गया है। विशाल जलाशय के जलद्वार को मुख्य मार्ग के उत्तर में देखा जा सकता है जो पहाड़ी के उत्तरी और दक्षिणी पर्वत स्कंध के बीच विशाल तटबंध के निकट है।

गयासुद्दीन के उत्तराधिकारी, मुहम्‍मद बिन तुगलक (1325-51) ने तुगलकाबाद के दक्षिण में स्थित पहाड़ी पर ‘आदिलाबाद’ का एक छोटा सा किला बनवाया था जिसके साथ यह निर्माण की मुख्य विशेषताओं को बांटता है।

स्मारक सूर्योदय से सूर्यास्त तक खुला रहता है।

प्रवेश शुल्क:- भारतीय नागरिक और सार्क देशों (बंगलादेश, नेपाल, भूटान, श्रीलंका, पाकिस्तान, मालदीव और अफगानिस्तान) और बिमस्टेक देशों (बंगलादेश, नेपाल, भूटान, श्रीलंका, थाईलेंड और म्यांमार) के पर्यटक- 15/-रूपए प्रति व्यक्ति
अन्य- 200/- रूपए प्रति व्यक्ति

(15 वर्ष तक की आयु के बच्चों के लिए प्रवेश नि:शुल्क है)।

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