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सूरजकुण्ड

टिकट द्वारा प्रवेश वाले स्मारक-हरियाणा

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ऐसा विश्वास है कि रोमन रंगमण्डल के समान दिखने वाला जल कुण्ड- सूरजकुण्ड का निर्माण तोमर राजा, सूरजपाल ने करवाया था जिसका अस्तित्व चारण परंपरा पर आधारित था। तोमर मूलरूप में दिल्ली के दक्षिण में अरावली के पहाड़ी क्षेत्र में बसे हुए थे और ऐसा माना जाता है कि बाद में वे सूरजकुण्ड क्षेत्र में जाकर बस गये थे।

नि:संदेह महत्वपूर्ण हिन्दू स्मारक, मंदिर और सूर्य की पूजा की पूर्व-इस्लामी अवधि (10वीं शताब्दी ईसवी) के हैं जो दिल्ली में मस्जिदों और मकबरों से पहले बनाए गए थे। सूरजकुण्ड का रूप उगते सूर्य जैसा है जिसका मुख पूर्व की ओर है। इसमें अर्धवृत्ताकार पत्थर की सीढियों का एक पुश्ता है जहां पहाड़ी से बहने वाले वर्षा जल का संचय किया जाता है। इसके तल का व्यास लगभग 130 मीटर है। यद्यपि इस विशाल कुण्ड की भव्यता नष्ट हो गई है फिर भी ऐसा माना जाता है कि शिकार खेलने आने वाले शाही परिवार के सदस्य यहां विश्राम करते थे। कुण्ड के किनारे और जंगल में नृत्य करते मोरों ने इसके आस पास के स्थल को आकर्षक बना दिया है। ऐसा माना जाता है कि यहां सूर्य मंदिर था। कुछ खण्डहर इसके साक्ष्य हैं। कुछ उत्कीर्णित पत्थर हाल ही में कुण्ड से प्राप्त हुए हैं जबकि कुछ का बाद के निर्माण कार्य में पुन: इस्तेमाल किया गया।

पत्थरों में आयी दरार से रिसने वाले ताजे पानी का तालाब जिसे सिद्घकुण्ड कहते हैं, सूरजकुण्ड के दक्षिण में लगभग 600 मीटर की दूरी पर स्थित है जो पुण्य दिवसों में तीर्थ यात्रियों का ध्यान आकर्षित करता है। इसके पास अनंगपुर गांव में एक बांध है जिसके निर्माण का श्रेय अनंगपाल को दिया जाता है। वर्षा के जल को रोकने के लिए एक संकरे खड्ड के आर पार एक क्वार्टजाइट पत्थर रखा हुआ है। आसपास की पहाडियों पर असंख्य किलों के अवशेष फैले हुए हैं जिससे इस विश्वास को बल मिलता है कि अनंगपाल द्वारा एक नगर की स्थापना की गई थी जो यहां कभी विद्यमान था।

फिरोजशाह तुगलक (1351-88) ने सिंचाई कार्यों में अत्यधिक रूचि ली थी और उसने उन पर चूना-कंकरीट बिछाकर उसकी सीढियों और कगार की मरम्मत करवायी थी। बाद में भी किलेबंदी वाला एक छोटा अहाता जिसे गढ़ी कहते थे, मंदिर के पारंपरिक स्थल के आस-पास पश्चिमी किनारे पर बनाया था।

यह स्मारक पूरे सप्ताह सुबह 9 बजे से शाम 5 बजे तक खुला रहता है।

प्रवेश शुल्क: भारतीय नागरिक और सार्क देशों (बंगलादेश, नेपाल, भूटान, श्रीलंका, पाकिस्तान, मालदीव और अफगानिस्तान) और बिमस्टेक देशों (बंगलादेश, नेपाल, भूटान, श्रीलंका, थाईलेंड और म्यांमार) के पर्यटक- 25/-रूपए प्रति व्यक्ति
अन्य- 300/- रूपए प्रति व्यक्ति

(15 वर्ष तक की आयु के बच्चों के लिए प्रवेश नि:शुल्क है)।

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