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सुल्तान गारी का मकबरा

Sultan Ghari’s Tomb

सुल्तान गारी का मकबरा कुतुब से लगभग 8 कि.मी. पश्‍चिम में स्थित है। यह सन् 1231 ईसवी में इल्तुत्मिश (1211-36) द्वारा अपने बड़े पुत्र और प्रत्यक्ष उत्तराधिकारी राजकुमार नसिरुद्दीन महमूद की स्मृति में बनवाया गया था। यह एक दीवार के घेरे में स्थित है जिसके किनारों पर बुर्ज बने हुए हैं। इससे यह एक किले जैसा दिखाई देता है। इसका कब्रवाला अष्टकोणीय कक्ष भूमिगत बनाया गया है क्योंकि इसके चारों ओर के स्तर को रूबल-पैकिंग से ऊपर उठाया गया था। छत कॉलमों पर टिकी हुई है जो दो स्तंभों पर आधारित हैं। ये स्तंभ पूर्ववर्ती हिन्दू मंदिर का भाग रहे होंगे। अन्य से लिए गए उत्कीर्णित सरदल चूने की कंकरीट वाली छत में लगे हुए पाए गए हैं। अन्य टुकड़े उनकी सजावट को अलग करने के बाद नमाज पढ़ने वाले कक्ष की छत पर लगाए गए और बुर्जों तथा स्तंभों का उन बरामदों में पुन: इस्तेमाल किया गया जिनका मूल रूप से मदरसे के रूप में इस्तेमाल किया जाता था। इस मकबरे की मरम्मत बाद में फिरोजशाह तुगलक (1351-88) द्वारा करवाई गई थी।

स्मारक सूर्योदय से सूर्यास्त तक खुला रहता है।

प्रवेश शुल्क:- भारतीय नागरिक और सार्क देशों (बंगलादेश, नेपाल, भूटान, श्रीलंका, पाकिस्तान, मालदीव और अफगानिस्तान) और बिमस्टेक देशों (बंगलादेश, नेपाल, भूटान, श्रीलंका, थाईलेंड और म्यांमार) के पर्यटक-1 5/-रूपए प्रति व्यक्ति
अन्य- 200/- रूपए प्रति व्यक्ति

(15 वर्ष तक की आयु के बच्चों के लिए प्रवेश नि:शुल्क है)।

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