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टिकट द्वारा प्रवेश वाले स्मारक-मध्य प्रदेश शाही किला, बुरहानपुर

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शाही किला, बुरहानपुर

बुराहनपुर के स्‍मारक फारूकी तथा मुगल वास्‍तुकला के परिचायक हैं। फारूकी राजाओं की इस पूर्ववर्ती राजधानी में भव्‍य इमारतों के अलावा, मकबरे भी ध्‍यान आकृष्‍ट करते हैं। 15वीं शताब्‍दी ईसवी का आदिल शाह का लालित्‍यपूर्ण चित्रित मकबरा ऊंची प्‍लिंथ पर निर्मित है तथा यह बाहर से वर्गाकार और अन्‍दर से अष्‍टभुजाकार है। शाह नवाज खान का मकबरा वास्‍तु-योजना में वर्गाकार है जो एक बरामदे से घिरा हुआ है और मुगलकालीन एक विशाल गुम्‍बद से ढका हुआ है।

16वीं शताब्‍दी ईसवी में निर्मित शाह शुजा के मकबरे में बेगम शुजा के मानवीय अवशेष हैं। पत्‍थर से बना यह मकबरा उभरी वृताकार नींव पर स्‍थित है तथा इस पर सीप के मसाले द्वारा पलस्‍तर किया गया है और चित्रकलाओं से सुसज्जित किया गया है। यह मकबरा एक गुम्‍बद से मुकटित है। 16वीं शताब्‍दी की इमारत, नादिर शाह का मकबरा समतल अग्रभाग के साथ उठे हुए चबूतरे पर निर्मित हैं। कक्ष में तीन कर्ब्रें हैं। गुम्‍बद आठ तोरणद्वारों पर टिका हुआ है।

बौर्द्धा दरवाजे के समीप जहॉं राजा जय सिंह का दाह-संस्‍कार किया गया था, राजा की छतरी को उनकी स्‍मृति में निर्मित किया गया था। यह एक शानदार खुला स्‍तंभोंवाला मंडप है। इसे मुगल शासक औरगंजेब (1658-1707) द्वारा बनवाया गया था। किले में स्‍थित महल, हमाम खाना को छोड़कर, अधिकांशत: ध्‍वस्‍त स्‍थिति में है। वर्तमान दीवारें और छतें हनी कोम्‍ब कार्य पर चित्रों से सुसज्‍जित हैं। हमाम खाना मुगल काल के दौरान निर्मित किया गया था। स्‍नानघर में अकबर और जहॉंगीर के प्रसिद्ध मंत्री, खान खाना मिर्जा अब्‍दुल रहीम खान के अभिलेख हैं। कमरों की छतें गुम्‍बदनुमा हैं। हमाम चित्रों से सुसज्‍जित है।

सूर्योदय से सुर्यास्‍त तक खुला है।

प्रवेश शुल्‍क: भारतीय नागरिक और सार्क देशों (बंगलादेश, नेपाल, भूटान, श्रीलंका, पाकिस्‍तान, मालदीव तथा अफगानिस्‍तान) तथा बिम्‍स्‍टैक देशों (बंगलादेश, नेपाल, भूटान, श्रीलंका, थाइलैंड और म्‍यांमार) के पर्यटक: 25 रुपए प्रति व्‍यक्‍ति
अन्‍य: 300 रुपए प्रति व्‍यक्‍ति

( 15 वर्ष तक के बच्‍चों के लिए प्रवेश नि:शुल्क)

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