"No fee shall be charged at Bodh Stupa, Sanchi, M.P on 28th November, 2021 on account of Sanchi Mahotsav, 2021""Internship Programme in Archaeological Survey of India-reg."

सफदरजंग का मकबरा

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सफदरजंग की उपाधि प्राप्त और मुहम्मद शाह (सन् 1719-48) के अधीन अवध के वायसराय रहे तथा बाद में अहमद शाह (1748-54) के अधीन प्रधान मंत्री बने मिर्जा मुकीम अबुल मंसूर खान (1739-54 ई.) का मकबरा लगभग सन् 1754 में सफदरजंग के पुत्र, शुजाउद्दौला द्वारा बनवाया गया था। यह मकबरा उस पद्धति का अंतिम उदाहरण है जो हुमायूँ के मकबरे से प्रारंभ हुई थी। यह मकबरा एक बडे बगीचे से घिरा है और चार-बाग पद्धति पर वर्गों में विभाजित है। इसके मध्य रास्ते के साथ टैंक और फव्वारे लगे हैं। पूर्व में एक दरवाजा है और अन्य तीन किनारों पर मंडप हैं। यह मकबरा घेरे के बीच में खडा है और उठे हुए चबूतरे पर निर्मित एक वर्गाकार दो मंजिला इमारत है। यह संगमरमर के गोल गुम्बद से ढका हुआ है। इसके आगे के भाग में लाल और बलुआ पत्थर लगाया गया है जो ‘अब्दुर-रहिम खान-ए-खानां’ के मकबरे से निकाला गया है। इसके कोनों की टावर पर बने संगमरमर के पैनल देखने में रमणीय ही नहीं हैं बल्कि आलंकारिक भी हैं। वस्तुत: इसका जरुरत से ज्यादा अलंकरण और समनुपात की कमी जो विशेष रूप से इसकी ऊर्ध्वाधर ऊंचाई द्वारा प्रमाणित है, के कारण इसका ”दिल्ली के मुगल वास्तुशिल्प में अंतिम टिमटिमाते दीए’ के रूप में वर्णन किया गया है।

स्मारक सूर्योदय से सूर्यास्त तक खुला रहता है।

प्रवेश शुल्क:-
भारतीय नागरिक और सार्क देशों (बंगलादेश, नेपाल, भूटान, श्रीलंका, पाकिस्तान, मालदीव और अफगानिस्तान) और बिमस्टेक देशों (बंगलादेश, नेपाल, भूटान, श्रीलंका, थाईलेंड और म्यांमार) के पर्यटक- 15/-रूपए प्रति व्यक्ति
अन्य- 200/- रूपए प्रति व्यक्ति

(15 वर्ष तक की आयु के बच्चों के लिए प्रवेश नि:शुल्क है)।

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