"Submitting of application for Exploration / Exacavation for the field season 2022-2023 - reg."

शैलकृत गुफा, बादामी

hdr_hampi

शैलकृत गुफा, बादामी

प्रारंभिक चालुक्‍य राजाओं ने गुफा उत्खनन हेतु बादामी (बीजापुर जिला) के महीन दानेदार स्तरित बलुआ पत्‍थर की पड़ी चट्टानों को चुना जिनमें बड़े गुफा-मंदिरों का उत्खनन और उनमें मूर्तियों एवं अलंकरण का सूक्ष्‍म उत्‍कीर्णन करना आसान था।

यहां चार गुफा मंदिर हैं जिनमें से तीन हिन्दू धर्म और एक जैन धर्म से संबंधित हैं। इनमें से सबसे प्राचीन गुफा सं.3 भगवान विष्‍णु को स‍मर्पित है जो इस श्रृंखला का सबसे बड़ा मंदिर है। इसके अभिलेख के अनुसार इसका उत्खनन शक संवत् 500 अर्थात् ईसवी सन् 578 में शक्तिशाली शासक, मंगलेश द्वारा करवाया गया था। इसके तुरन्‍त बाद अन्‍य दो का उत्खनन हुआ। सबसे छोटी गुफा सं. 2 भी विष्‍णु भगवान को समर्पित है और मध्‍यम आकार की गुफा सं.1 भगवान शिव को समर्पित है। पहाड़ी के सबसे ऊपर जैन-गुफा मंदिर है जो अन्‍य गुफाओं से लगभग एक शताब्‍दी बाद का है।

इन गुफा मंदिरों में अनिवार्यत: आयताकार स्‍तंभ वाला बरामदा (मुख-मण्‍डप) लगभग वर्गाकार स्‍तंभों वाला हॉल (महा-मण्‍डप) और उसके पिछले भाग में लगभग वर्गाकार एक छोटी वेदिका कक्ष (गर्भ-गृह) है। शैलकृत समतल छत वाले मण्‍डप प्रकार के इन मंदिरों के अग्रभाग के द्वार चौड़े और काफी ऊंचे हैं। अग्रभाग के लंबे और विशाल स्‍तंभ पर प्राय: उत्‍कीर्णन किया हुआ है। विशाल स्‍तंभ के अग्रभाग में एक फ्रेम कलाकारी द्वारा निर्मित लटकते शिला फलक, छज्‍जे या कार्निस (कपोत) जैसे दिखते हैं और इससे ऐसा लगता है मानों उसके नीचे काष्‍ठ कार्य किया हुआ हो। ब्रेकटों के ऊपर बीम और कार्निस के निचले फ्रेम को भी टेक दी गई है, मानों इन्हें लगभग गोल आकार में उत्कीर्णित मानवीय, दैवीय तथा पशु आकृतियों के एक बड़े परी-खंबे द्वारा सहारा दिया गया हो। बरामदे की छतों को आर-पार डाले गए बीमों द्वारा दिलेहदार छतों का रूप दिया गया है और ये उभरी हुई नक्‍काशियों से भरी गईं हैं। आन्‍तरिक स्तंभ, विशेष रूप से बरामदे की भीतरी पंक्ति के स्तंभ, यद्यपि आधार पर वर्गाकार हैं, गोलाकार काट के शीर्ष घटकों जैसे कि घटाकार कलशों तथा कुशन के आकार के बल्बनुमा कुम्‍भों से परिपूर्ण हैं जो सर्वाधिक महत्‍वपूर्ण हैं। आन्‍तरिक भाग में, स्तंभ वाले हॉल में स्तंभों का विन्यास हल्‍का सा भिन्‍न दिखता है लेकिन अग्र भाग की तरह जहां केन्‍द्रीय स्तंभों के बीच अन्‍त: स्तंभ विन्यास पार्श्‍व स्‍तम्‍भों से कुछ बड़ा है। भीतरी स्‍तंभ बहु-कोणीय हैं

प्रवेश शुल्क:-

भारतीय नागरिक और सार्क देशों (बंगलादेश, नेपाल, भूटान, श्रीलंका, पाकिस्तान, मालदीव और अफगानिस्तान) और बिमस्टेक देशों (बंगलादेश, नेपाल, भूटान, श्रीलंका, थाईलेंड और म्यांमार) के पर्यटक- 15/-रूपए प्रति व्यक्ति
अन्य- 200/- रूपए प्रति व्यक्ति

(15 वर्ष तक की आयु के बच्चों के लिए प्रवेश नि:शुल्क है)।

Facebook Twitter