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टिकट द्वारा प्रवेश वाले स्मारक-तमिलनाडु राजगिरि किला तथा कृष्‍णगिरि किला, जिंजी

Rajagiri Fort and Krishnagiri Fort, Gingee

यद्यपि जिंजी स्‍थित पहाड़ी किले के निर्माण का श्रेय पारम्‍परिक रूप से एक स्‍थानीय प्रमुख, अनादा कोन को जाता है, तथापि आरंभिक 17वीं शताब्‍दी में जिंजी के नायकों के उत्‍थान से इसे विशिष्‍टता प्राप्‍त हुई। बीजापुर के मुस्‍लिम सुल्‍तानों, मुगलों, मराठों ने सदैव किले के सामरिक महत्‍व को पहचाना तथा इस किले को अपने पास बनाए रखने के लिए प्रत्‍येक ने सदैव कड़ा संघर्ष किया। यहाँ तक कि महान मराठा योद्धा, शिवाजी का यह स्‍वप्‍न साकार हुआ क्‍योंकि मुगलों के साथ युद्ध में जब राजाराम महाराष्‍ट्र भाग गए तब कुछ माह के लिए जिंजी मराठा शक्‍ति का स्‍थल रहा।

तीन प्रमुख छोटी पहाड़ियों अर्थात् राजगिरि, कृष्‍णगिरि तथा चक्‍काली दुर्ग तथा इनके बीच के खुले स्‍थानों के ऊपर जिंजी की बाहरी किलेबंदी त्रिकोणीय आकार की बनी है। किलेबंदी लगभग 13 किलोमीटर लम्‍बी है तथा किला लगभग 11 वर्ग किलोमीटर क्षेत्र में फैला है। इसके दो प्रमुख द्वार अर्थात् आरकोट तथा पांडिचेरी द्वार हैं।

प्राचीन शहर मध्यवर्ती खुले स्‍थान में स्‍थित था। आन्‍तरिक किलेबंदी राजसी भवनों के चारों ओर तथा महत्‍वपूर्ण राजगिरि पहाड़ी और उसके पदतल पर स्थित है। महत्‍वपूर्ण राजसी भवनों में कल्‍याण महल, राजसी कर्मचारियों के लिए पंक्‍तिबद्ध अहाते (गलती से अश्‍व अस्‍तबल नाम दिया गया) बृहद् अन्‍न भंडार (गलती से जिम्‍नेस्‍यिम नाम दिया गया) तथा साथ में शासकों के विशिष्ट आवासों के अवशेष, राजा का श्रोता हॉल तथा मंत्रिपरिषद् की बैठक के लिए निजी कक्ष, एक महल परिसर, हाथी का टैंक नाम से मशहूर एक बड़ा टैंक शामिल है। ये सभी पहाड़ी के पदतल पर स्‍थित हैं। कृष्‍णगिरि के शिखर पर विलास मंडप तथा कृष्‍ण मंदिर के अवशेष भी समान रूप से राजसी प्रकार के हैं।

कल्‍याण महल सात मंजिला विलास मंडप है। यहाँ एक सीढ़ीदार टैंक हैं जिसकी सीढ़ियों की चिनाई में फव्‍वारे लगे हुए हैं। संभवतया टैंक में नालियों की प्रणाली तथा बारिश के अतिरिक्‍त जल द्वारा पानी भरा जाता था। यहाँ घुमावदार सीढ़ी है जो आंतरिक हॉल की चिनाई के साथ-साथ चलती हैं। सभी तलों पर आंतरिक हॉल में चारों ओर एक-एक खुला बरामदा है।

शासक के निजी मकान के केन्‍द्र में एक हॉल है जो छोटे-छोटे कक्षों से घिरा हुआ है तथा इसमें एक निजी प्रसाधन कक्ष है। श्रोता हॉल में उतरने के लिए एक घुमावदार सीढ़ी है। श्रोता हॉल वर्गाकार है जो ऊंचे तथा पारम्‍परिक मंदिर जैसी मोटी गढ़त से सुसज्‍जित चबूतरे के कारण उल्‍लेखनीय है। यहां एक बड़ा प्रस्‍तर पीठासन है। इसमें दरबारियों के लिए एक-दूसरे से जुड़े सभा मंच हैं।

पहाड़ी के शिखर पर लघु किलों की श्रंखला है। यहाँ इस स्‍थान की संरक्षक देवी कमलाक्‍कनाई अम्‍मा का मंदिर है। ऊपर अन्‍न भंडार, मैगजीन, तोप सहित बुर्ज तथा मंदिर है।

आंतरिक किलेबंदी का समग्र विन्‍यास, रहने वालों की आवश्‍यकताओं पर विचार करते हुए भलीभांति बनाया गया था जिसमें दीर्घकालिक घेराबन्‍दी के अवसर पर सुरक्षा तथा भरण-पोषण की व्‍यवस्‍था थी।

आंतरिक किले के बाहर की संरचना में वेंकटरमन मंदिर, प्राचीन जिंजी का मंदिर तथा सदातुल्‍ला खान की मस्जिद शामिल है।
प्रात: 9.00 बजे से सायं 5.30 बजे तक खुला रहता है।

प्रवेश शुल्क: भारतीय नागरिक और सार्क देशों (बंगलादेश, नेपाल, भूटान, श्रीलंका, पाकिस्तान, मालदीव और अफगानिस्तान) और बिमस्टेक देशों (बंगलादेश, नेपाल, भूटान, श्रीलंका, थाईलेंड और म्यांमार) के पर्यटक 25/-रूपए प्रति व्यक्ति
अन्‍य: 300/- रू0 प्रति व्‍यक्‍ति।

(15 वर्ष तक की आयु के बच्चों के लिए प्रवेश नि:शुल्क है)।

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