"All Centrally Protected Monuments & Museums of ASI will remain closed till 31.05.2021 or until further orders due to COVID situation."

शिलातलीय प्राकृतिक गुफा, इलादीपट्टनम (सित्‍तान्‍नावसल)

Natural Cavern with stone beds

इलादीपट्टनम नामक एक कम ऊंचाई वाली पहाड़ी के शिखर पर स्‍थित यह प्राकृतिक गुफा काफी खुली है और इसकी छत नीची है। यहाँ लगभग 17 शैय्याएं हैं। ये प्रस्‍तर तकिए के साथ आयताकार समतल जगहें हैं जो कायोत्सर्ग तथा सल्लेखना जैसी तपस्‍याएं करने के लिए जैन तपस्‍वियों के प्रयोग के लिए थी।

कई शय्याओं में उत्कीर्ण लेख हैं जिनमें से सबसे पहला परवर्ती दूसरी शताब्दी ई.पू. की अवधि का है जो तमिल ब्राह्मी लिपि में है जिसमें लिखा है कि सिरुपोसिल इलायर ने इस अतितानम (अधिष्ठान, वेदी या एक रहने का स्थान) को कावुती आइतन के लिए बनवाया था जिनका जन्म इओमीनाडु में कुमुजुर में हुआ था। विद्वान इस भू-भाग की पहचान एरूमिनाडु अर्थात् आधुनिक मैसूर के रूप में भी करते हैं।

इस शैय्या पर अंकित 7वीं शताब्‍दी ई. के एक शिलालेख से पता चलता है कि जैन तपस्‍वियों ने इन शय्याओं तथा गुफाओं का लम्‍बे समय तक प्रयोग किया। अन्‍य अभिलेखों में विभिन्‍न जैन साधुओं के नाम दिए गए हैं जिनसे पता चलता है कि दूसरी शताब्‍दी ई.पू. से 13वीं शताब्‍दी ई. तक ये आश्रय प्रयोग में लाए जाते रहे। इसके अलावा, इसी पहाड़ी पर एक अन्‍य प्राकृतिक गुफा में पांचवीं-छठी शताब्‍दी ई. अवधि के वाट्टेलेट्टू लिपि में लिखे कई गढ़त शिलालेख अभी हाल ही में प्राप्‍त हुए हैं।

प्रात: 9.00 बजे से सायं 5.00 बजे तक खुला रहता है।

प्रवेश शुल्क: भारतीय नागरिक और सार्क देशों (बंगलादेश, नेपाल, भूटान, श्रीलंका, पाकिस्तान, मालदीव और अफगानिस्तान) और बिमस्टेक देशों (बंगलादेश, नेपाल, भूटान, श्रीलंका, थाईलेंड और म्यांमार) के पर्यटक 15/-रूपए प्रति व्यक्ति
अन्‍य: 200/- रूपए प्रति व्‍यक्‍ति।

(15 वर्ष तक की आयु के बच्चों के लिए प्रवेश नि:शुल्क है)।

Facebook Twitter