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संग्रहालय-तामलुक

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पुरातत्‍वीय संग्रहालय, तामलुक (पश्‍चिम बंगाल)

तामलुक (22° 22′ उ. 87° 55′ पू.) पूर्वी मिदनापुर जिला, पश्‍चिम बंगाल का मुख्‍यालय है और यह कलकत्‍ता से सड़क के रास्‍ते जुड़ा है और इससे 100 कि.मी. की दूरी पर स्थित है। दक्षिण पूर्वी रेलवे के कोलकाता-खड़गपुर मार्ग पर स्‍थित मेचेदा निकटतम रेल स्‍टेशन है।

रूपनारायण नदी के दाहिने तट पर स्‍थित तामलुक का ताम्रलिप्‍ता, दामलिटता, ताम्रलिपि, ताम्रलित्‍तिका या वेलकुला, जैसे विभिन्‍न नामों से प्राचीन पाली और संस्‍कृत साहित्‍य में उल्‍लेख मिलता है। यह एक महत्‍वपूर्ण पत्‍तन के रूप में कार्य करता था जहां से भारतीय समुद्रगामी जहाज सुदूर देशों में जाया करते थे। प्‍लिनी और महान भूगोलविद् प्‍टोलेमी की रचनाओं में भी तामलुक का क्रमश: तालुक्‍ते और तामालाइट्स के रूप में उल्लेख किया गया है। फाह्यान, ह्यून सांग और इत्‍सिंग जैसे प्रसिद्ध चीनी तीर्थयात्रियों ने जिन्होंने इस स्‍थान की यात्रा की, इस फलते-फूलते पत्‍तन नगर का सजीव विवरण प्रस्‍तुत किया है। एक समृद्ध वाणिज्‍यिक नगर होने के अलावा, यह महान धार्मिक केन्‍द्र भी था।

इस स्‍थल की प्राचीनता और महत्‍व समय-समय पर किए गए उत्‍खनन से सुस्‍थापित हो गया है। इस स्‍थल के महत्‍व का आकलन करते हुए, भारतीय पुरातत्‍व सर्वेक्षण ने इसकी सांस्कृतिक श्रृंखला को उजागर करने के लिए 1954-55 में क्रमबद्ध उत्‍खनन प्रारंभ किया। उत्‍खनन ने नवपाषाण युग के प्रारंभिक अधिवास से आधुनिक समय तक के अधिवास को उजागर किया।

नवपाषाण संस्‍कृति से संबंधित अवधि-I की मुख्‍य विशेषता अपूर्ण तरीके से पकाए गए भूरे मृदभांड के साथ-साथ नवपाषाणकालीन कुल्‍हाड़ीनुमा हथियारों का पाया जाना है। कुछ अंतराल के बाद यह स्‍थल तीसरी दूसरी शताब्‍दी ई. पू. में पुन: बसा हुआ देखा गया। शुंग अवधि की टेराकोटा की मूर्तिकाएं, ढलवां ताम्र सिक्‍के, एन बी पी मृदभांड इस अवधि की सांस्‍कृतिक संपदा का निर्माण करते हैं।

तामलुक और आसन्‍न क्षेत्र की समृद्ध सांस्‍कृतिक विरासत को परिरक्षित करने के मुख्‍य उद्देश्‍य से स्‍थानीय जनता की रूचि और उत्‍साह के परिणामस्‍वरूप 1975 में तामलुक संग्रहालय और अनुसंधान केन्‍द्र की स्‍थापना की गई। नवनिर्मित संग्रहालय में, दीर्घाओं को मुख्‍य कक्ष में व्‍यवस्‍थित किया गया है जिसमें मिहिनापुर जिले के विभिन्‍न भागों से संग्रहित पूर्व-ऐतिहासिक औजार मौजूद हैं। दीर्घा में हड्डी के औजार, तीर-शीर्ष, चाकू, बर्छी, मछली पकड़ने का कांटा इत्‍यादि भी प्रदर्शित किए गए हैं।

तामलुक शुंगकालीन अपने विशिष्‍ट टेराकोटा पटियों के कारण टेराकोटा कला के क्षेत्र में प्रसिद्ध हुआ है। प्रदर्शित की गई टेराकोटा वस्‍तुओं में मुख्‍यत: उत्‍कृष्‍ट स्‍त्री मृतिकाओं को दर्शाया गया है जिन्‍हें जातक कथाओं में लोकप्रिय रूप यक्षियों के रूप में जाना जाता है। कुषाण अवधि की टेराकोटा कला में 1-5 शताब्‍दी ईसवी के मानव आकारों वाले मृतिकाओं और खिलौना गाड़ियां दर्शायी गई हैं। संग्रह में उत्‍तर गुप्‍त अवधि की मुद्राएं और मुद्रांकन, पाल अवधि की पुरावस्‍तुएं प्रदर्शित की गई हैं। चांदी के आहत सिक्‍कों, ढलवा ताम्र सिक्‍कों, मुस्‍लिम शासकों के सिक्‍कों से लेकर आधुनिक काल के सिक्‍कों तक भारतीय सिक्‍का निर्माण के विकास को दर्शाया गया है।

रोमन दोहत्‍था सुराही प्रदर्शित की गई एक अन्‍य रोचक वस्‍तु है जो रोम के साम्राज्‍य के साथ इस क्षेत्र के व्‍यापारिक संपर्कों को इंगित करता है। पट्टचित्र के रूप में प्रसिद्ध सूचीनुमा चित्रावली लोककला की एक शैली के रूप में बंगाल के विभिन्‍न क्षेत्रों में व्‍यापक रूप से फैली रही है। प्रदर्शित वस्‍तुओं में पौराणिक और मिथकीय कथाओं को दर्शाने वाली ऐसी रंगीन सूचीनुमा चित्रावली शामिल है।

कोई प्रवेश शुल्‍क नहीं

संग्रहालय शुक्रवार को बंद रहता है।

स्मारकों की सूची
अधिक जानकारी के लिए, कृपया यहां जाएं:

Contact detail

Shri D.N. Sinha, Assistant Superintending Archaeologist,
Archaeological Museum, Archaeological Survey of India, Tamluk- 721 636 East Midnapore, West Bengal
Ph: 03228-266773

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