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टिकट द्वारा प्रवेश वाले स्मारक-तमिलनाडु संरचनात्‍मक मंदिर

संरचनात्‍मक मंदिर
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संरचनात्‍मक मंदिरों में समुद्र तटीय मंदिर है जिसमें क्षत्रियसिंहेश्‍वरम (पूर्व) और राजसिंहेश्‍वर (पश्‍चिम)- दो मनोहारी शिव मंदिर हैं। इनका निर्माण पल्‍लव नरेश राजसिम्हा (728-700 ई.) ने करवाया था जो एकाश्म रथों को तराशने के साथ ही आरंभ हुए स्‍थापत्‍य कलात्मक प्रयासों की पराकाष्‍ठा को रेखांकित करते हैं। पश्चिमी मंदिर में एक बाह्य दीवार (प्राकार) है और एक साधारण प्रवेश द्वार (गोपुर) है। इसकी ऊंचाई को सुरूचिपूर्ण ढंग से अनुपातित किया गया है। बीच में विश्राम मुद्रा में लेटे विष्‍णु (नरपतिसिम्हा पल्‍लवगृहम) का एक आरंभिक मंदिर है। इसमें कोई अधिसंरचना नहीं है।

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Shore Temple

इन सभी मंदिरों के नाम राजसिम्‍हा के विभिन्‍न उपनामों का प्रतिनिधित्‍व करते हैं। नंदियों सहित बाह्य अहाता परवर्ती उत्‍तर काल का है। इस रमणीक स्‍थल की अंतर्निहित समस्‍याओं से पूर्णत: परिचित होते हुए वास्‍तुकारों ने समुद्र से बहिर्विष्‍ट और पृथ्‍वी की सतह से ऊपर उठी चट्टान पर मंदिर का निर्माण किया। ग्रेनाइट और लेप्‍टीनाइट जैसे कठोर पत्‍थरों का प्रयोग भी अपघर्षी वायु तथा लवणीय परिवेश द्वारा होने वाले अपक्षरण को रोक न‍हीं सका। तटरक्षक दीवार , वनरोपण तथा हाल के दिनों में नमक के आवधिक निष्कर्षण ने इस प्रभाव को सीमित किया है। उठी हुई चट्टान का प्रयोग भी कई उत्‍कृष्‍ट कलाकृतियों जैसे उत्‍खनित लघु मंदिर, भूवराह मूर्ति, विष्णु मंदिर और सुंदरता से उत्कीर्णित हिरण सहित महिषासुर मर्दनी मंदिर को तराशने के लिए किया गया था।

मुकुंदनयनारऔरओलक्‍कानेशवरमंदिरअन्‍यउल्‍लेखनीयसरंचनात्मकमंदिरहैं।

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