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टिकट द्वारा प्रवेश वाले स्मारक-तमिलनाडु महाबलीपुरम् स्‍मारक समूह, जिला कांचीपुरम्

महाबलीपुरम् स्‍मारक समूह, जिला कांचीपुरम्

उत्‍खनित अवशेष

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विगत शताब्‍दी में रेत के निरंतर हटने से समुद्र तटीय मंदिर के आस –पास की जमीन में दबी अनेक संरचनाएं सामने आई हैं। इन सब में आरंभिक पल्‍लव काल की सीढ़ीदार संरचना सबसे अनूठी है जो लगभग 200 मीटर लंबी है। यह संरचना समुद्र के समानांतर उत्‍तर से दक्षिण की ओर जा रही है। इस विशाल इमारत का ठीक –ठीक प्रयोजन क्‍या था, यह अभी तक निश्चित नहीं है। इसकी सीढि़यां एक लेटराइट कोर पर अंतर-संयोजित ग्रेनाइट स्‍लैबों से निर्मित है। यहां जो बुद्धिमत्‍तापूर्ण अंतर-संयोजन पद्धति अपनाई गई थी उससे ये स्‍लैब ढहने से बच गए और ये एकाश्म परंपराओं की याद दिलाते हैं। .

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समुद्र तटीय मंदिर के अग्र भाग में सीढ़ीदार संरचना

1990 में अकस्‍मात् खोजी गई भूवराह मूर्ति , लघु मंदिर और कुआं पल्‍लव नरेश नरसिंह वर्मन मामल्ल ( 638 से 660 ई.) के शासन काल के हैं लेकिन ये राजसिम्हा ( 700 से 728 ई.) के शासन काल में निर्मित एक दीर्घवृत्‍ताकार अहाते द्वारा घिरे हैं। इन अवशेषों या खंडहरों को अनगढ़ आधार शैल पर तराशा गया है और यहाँ विष्‍णु जी लेटी हुई मुद्रा में विराजमान हैं।

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समुद्र तटीय मंदिर के उत्‍तर में स्थित लघु मंदिर

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लघु मंदिर और वराह का सन्निकट दृश्य

शिव को समर्पित लघु मंदिर का 16 पार्श्व वाला आधार है जिसे आधार शैल में से तराश कर बनाया गया है जबकि वृत्‍ताकार भित्ति तथा अधिसंरचना संरचनात्‍मक हैं। इसका शिल्‍प अनूठा है और पल्‍लव काल के अन्‍य एक स्‍तर वाले मंदिरों से भिन्‍न है। भूवराह को गहरे सागर से प्रतीकात्‍मक रूप से धरती मां को निकालते हुए दर्शाया गया है। इसे अज्ञात कारणों से जान –बूझ कर तोड़ दिया गया था। आधार पर पल्‍लव शासक राजसिम्हा का नाम खुदा है। परिवेष्‍टक भित्ति का निर्माण संभवत: इसलिए किया गया था कि अंदर रेत न आने दी जाए और यह आधार रेत से ढक न जाए। इसके अवशेषों में सबसे ऊपरी रद्दे पर पल्‍लव –ग्रंथ लिपि में एक अभिलेख है जिसमें राजा की अर्जुन के साथ तुलना की गई है।

हाल ही में दो मंदिरों के खंडहरों की खुदाई की गई है। एक समुद्र तटीय मंदिर के दक्षिण में है और दूसरा की ईंट निर्मित विशाल सुब्रह्मण्‍य मंदिर का खंडहर है जो यहां से लगभग 7 कि॰मी॰ दूर सालुवनकुप्‍पम नामक एक बस्‍ती में बाघ गुफा के समीप है।

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सुब्रह्मण्‍य मंदिर , सालुवनकुप्‍पम का उत्‍तर से अवलोकन

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सुब्रह्मण्‍य मंदिर , सालुवनकुप्‍पम का दक्षिण से अवलोकन

प्रवेश शुल्क: समुद्र तटीय मंदिर और पाँच रथों के लिए भारतीय नागरिक और सार्क देशों (बंगलादेश, नेपाल, भूटान, श्रीलंका, पाकिस्तान, मालदीव और अफगानिस्तान) और बिमस्टेक देशों (बंगलादेश, नेपाल, भूटान, श्रीलंका, थाईलेंड और म्यांमार) के पर्यटक- 30/-रूपए प्रति व्यक्ति
अन्य-500/- रूपए प्रति व्यक्ति
(15 वर्ष तक की आयु के बच्चों के लिए प्रवेश नि:शुल्क है)।

एक स्‍मारक पर खरीदी गई टिकट अन्‍य स्‍मारकों पर भी वैध होगी।
छोटी पहाड़ी पर स्थित शेष स्‍मारकों तथा अन्‍य स्‍थानों पर प्रवेश अभी नि :शुल्‍क है।
हाथ से पकड़े जाने वाले कैमरों से स्टिल फोटोग्राफी करने के लिए कोई शुल्‍क नहीं है।
हाथ से पकड़े जाने वाले कैमरों से वीडियोग्राफी करने के लिए 25 रू . । अनुमति लेने के लिए काउंटर पर एक साधारण फार्म भरा जा सकता है।
अन्‍य सभी प्रकार की फोटोग्राफी और वीडियोग्राफी के लिए अधीक्षण पुरातत्‍वविद् , ए .एस .आई , चेन्‍नई मंडल, चेन्नई – 9 से संपर्क किया जा सकता है (फोन-25670397, 25670396)
खुलने का समय : सभी दिन प्रात 6 से सायं 6 बजे तक। प्रवेश टिकटों की बिक्री सायं 5.30 बजे बंद हो जाएगी।

कैसे पहुंचे

महाबलीपुरम, चेन्नई से लगभग 58 कि॰मी॰ दूर है और ईस्‍ट कोस्ट रोड़ पर है तथा सार्वजनिक और निजी परिवहन से भली –भांति जुड़ा हुआ है। निकटतम हवाई अड्डा चेन्‍नई है

सांस्कृतिक साइटें

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