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हयात बख्श उद्यान और मण्‍डप

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हयात बख्श उद्यान और मण्‍डप

मोती मस्‍जिद के उत्‍तरी क्षेत्र में एक उद्यान है जिसे हयात बख्श उद्यान (जीवन दायी उद्यान) कहा जाता है जो मुगल शासकों के पैटर्न पर चार भागों में विभाजित है और उनके बीच में सेतुक और प्रणाल हैं। इसका उल्‍लेख समकालीन लेखे-जोखे में मिलता है हालांकि इसका मौजूदा विन्‍यास नया है।

बाग के उत्‍तर-पूर्वी कोने पर एक बुर्ज है जिसे शाह बुर्ज कहा जाता है। इस पर इस समय गुम्‍बद नहीं है। इसे विद्रोह के कारण काफी क्षति पहुंची थी। इसी तरह का आसद नामक बुर्ज किले के दक्षिण-पूर्वी किनारे पर खड़ा है। नहर-ए-बिहिश्‍त को भरने के लिए पानी नदियों से शाह बुर्ज तक ऊपर उठाया जाता था और उसके बाद प्रणाल द्वारा विभिन्‍न महलों में ले जाया जाता था। दक्षिण में बुर्ज के साथ लगा मौजूदा मण्‍डप संभवत: औरंगजेब के शासनकाल के दौरान बनाया गया था। उत्‍तरी दीवार के मध्‍य में एक संगमरमर झरना है जो शंखाकार कुण्‍ड में गिरता था।

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सावन मण्‍डप, लाल किला

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सावन मण्‍डप, लाल किला में मोमबत्‍तियों के लिए आलों के साथ तालाब का दृश्य

उद्यान के उत्‍तरी और दक्षिणी किनारों के मध्‍य में दो संगमरमर के मंडप हैं जिन्‍हें वर्षा ऋतु के दो मुख्‍य महीनों के नामों पर सावन और भादो कहा जाता है क्‍योंकि या तो वे इन दो महीनों का प्रतिनिधित्‍व करते हैं अथवा इन दो महीनों में इनका उपयोग होता होगा। परंतु कौन-सा सावन है और कौन-सा भादो, यह निश्‍चित तौर पर ज्ञात नहीं है।
इसके पार्श्‍वों में मोमबत्‍तियों के लिए आलों सहित एक तालाब है ताकि उन पर गिरने वाला पानी एक मनोहारी दृश्‍य प्रस्‍तुत करे।

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भादों मण्‍डप, लाल किला

ूर्वी दीवार के साथ-साथ ऊँची भूमि पर संगमरमर के दो मण्‍डप हैं जिन्‍हें बहादुर शाह-द्वितीय ने बनाया था। उत्‍तरी दिशा में मण्‍डप का नाम मोती महल है और इस समय दक्षिणी दिशा के मण्‍डप का नाम हीरा महल है। मोती महल को विद्रोह के बाद हटा दिया गया था। हीरा महल अभी भी मौजूद है। उद्यान के मध्‍य में एक बड़ा तालाब है जिसके मध्‍य में लाल पत्‍थर के मण्‍डप के साथ एक बड़ा तालाब है जो मूलत: उद्यान के साथ एक सेतु से जुड़ा हुआ था। इसे बहादुर शाह के नाम पर जफर महल के नाम से जाना जाता है। इसे लगभग 1842 में बहादुर शाह-द्वितीय द्वारा बनवाया गया था।

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Zafar Mahal, Red Fort

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