"All Centrally Protected Monuments & Museums of ASI will remain closed till 31.05.2021 or until further orders due to COVID situation."

टिकट द्वारा प्रवेश वाले स्मारक-मध्य प्रदेश ग्‍वालियर किला

main_img

ग्‍वालियर किला

किले का इतिहास पांचवी ईसवी का या संभवत: इससे भी पहले का है। प्राचीन संस्‍कृत शिलालेख में दर्ज इस पहाड़ी का पुराना नाम गोपागिरी है। यह गुप्‍तवंश, हूणों, प्रतिहारों, कच्‍छवाहों, तोमरों, पठानों, मुगलों, अंग्रेजों और मराठों के बदलते साम्राज्‍यों का साक्षी है जिन्‍होंने विभिन्‍न स्‍मारकों के रूप में अपने ऐतिहासिक चिह्न छोड़े हैं जो आज भी सुरक्षित हैं। इस किले के परिसर में मौजूद मुख्‍य स्‍मारक इस प्रकार हैं:- मन मंदिर, तेली का मंदिर, सास बहू मंदिर, बादल महल, आलमगीर दरवाजा, गणेश दरवाजा, चतुर्भुज दरवाजा, शैलकृत जैन कोलोसी, उर्वाई दरवाजा आदि।

प्रारंभिक वास्‍तुकलात्मक प्रयासों में 8वीं शताब्‍दी ईसवी का तेली का मंदिर निश्‍चित तौर पर सबसे पहले का है। इस मंदिर की प्रामाणिक विशेषता इसकी शानदार मिश्रित अधिसंरचना है जिसमें नागर आधार पर वल्लभी शिखर को दर्शाया गया है। चतुर्भुज मंदिर, इस स्‍थान का अन्‍य प्रारंभिक मंदिर है जो निश्चित रूप से 875 ईसवी का है। यह इस पूरे क्षेत्र में केवल एक एकाश्‍म शैलकृत मंदिर के रूप में खड़ा है। पहाड़ी किले में दो वैष्‍ण्‍व मंदिर हैं जिन्‍हें सास-बहू मंदिर के नाम से जाना जाता है। इनका निर्माण कच्‍छपघातों के शासन काल के दौरान हुआ था और इनमें अत्यधिक अलंकरण के रूप में कलात्‍मक प्रयासों का उत्कर्ष देखने को मिलता है। जैन‍धर्म भी तोमर राजाओं के शासन काल के दौरान विशेष रूप से फल-फूल रहा था जैसाकि उर्वाही रोड़ के दोनों ओर बनी प्रतिमाओं और विशाल शैलकृत जैन मूर्तियों जिसमें एक पत्‍थर की बाऊड़ी भी है, से इन जैन तीर्थंकरों की अनेक विशालकाय प्रतिमाओं का बोध होता हैं। वास्‍तुशिल्‍प के महान संरक्षक, राजा मान सिंह का महल, हिंदू वास्‍तुकला का एक रोचक उदाहरण है जिस पर आमतौर पर प्रचलित इस्‍लामी वास्‍तुकला की झलक भी दिखायी देती है।
सूर्योदय से सूर्यास्त तक रहता खुला है।

प्रवेश शुल्क: भारतीय नागरिक और सार्क देशों (बंगलादेश, नेपाल, भूटान, श्रीलंका, पाकिस्तान, मालदीव और अफगानिस्तान) और बिमस्टेक देशों (बंगलादेश, नेपाल, भूटान, श्रीलंका, थाईलेंड और म्यांमार) के पर्यटक 25/-रूपए प्रति व्यक्ति
अन्य: 300/- रूपए प्रति व्यक्ति

(15 वर्ष तक की आयु के बच्चों के लिए प्रवेश नि:शुल्क है)।

Facebook Twitter