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टिकट द्वारा प्रवेश वाले स्मारक-असम मैदाम (समाधि टीले) समूह, चराईदेव

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मैदाम (समाधि टीले) समूह, चराईदेव

शिव सागर के पूर्व में 28 कि.मी. की दूरी पर स्थित चराईदेव (अक्षांश 26°; देशांतर 95°) सुकाफा (1228-56 ईसवी सन) द्वारा स्थापित अहोम की पहली राजधानी थी जो मोंग-माओ या मोंग माओलिंग, चीन के दक्षिण-पश्चिमी क्षेत्र का प्रवासी था। यह स्थान मैदाम के लिए प्रसिद्घ है जिसका शाब्दिक अर्थ समाधि का टीला है।

वास्तुशिल्प की दृष्टि से इसमें गुम्बदी अधिरचना वाला एक बहुत बड़ा भूमिगत शव कक्ष है जिसमें एक या एक से अधिक कक्ष बने हैं और जो मिट्टी के टीलों से ढके हुए हैं और बाहर से यह अर्धगोलाकार टीले के रूप में दिखाई देता है। टीले के ऊपर एक छोटा खुला मंडप- चाओ-चाली है। एक कम ऊंचाई की अष्टभुजाकार दीवार पूरे समाधि टीले को घेरे हुए है। अहोम चराईदेव में दिवंगत परिवार के सदस्यों को रखते थे जहां पहला राजा सुकाफा दफन था। ऐतिहासिक तथ्यों से पता चलता है कि पत्नियां, परिचारक, पालतु पशु और अत्यधिक मात्रा में बहुमूल्य सामग्री दिवंगत राजा के साथ दफनायी जाती थी।

मैदाम संख्या 2 के हाल ही के उत्खनन से एक बहुत बड़ा शव कक्ष मिला है और यह ढांचा मिट्टी के बड़े ढेर से ढका हुआ था। उत्खनन के दौरान तल पर एक अष्टभुजाकार चारदीवारी मिली है। हाथी दांत और काष्ठ की वस्तुओं के खंडित अवशेष इस मैदाम के भीतरी कक्ष से प्राप्त हुए हैं।

खुलने का समय: सूर्योदय से सूर्यास्त तक

प्रवेश शुल्क: भारतीय नागरिक और सार्क देशों(बंगला देश, नेपाल, भूटान, श्रीलंका, पाकिस्तान, मालदीव और अफगानिस्तान) और बिमस्टेक देशों (बंगला देश, नेपाल, भूटान, श्रीलंका, थाईलेंड और म्यांमार) के पर्यटक 15/-रूपए प्रति व्यक्ति
अन्य: 200/- रूपए प्रति व्यक्ति

(15 वर्ष तक की आयु के बच्चों के लिए प्रवेश नि:शुल्क है)।

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