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एलीफेंटा गुफाएं (1987), महाराष्‍ट्र

एलीफेंटा गुफाएं (1987), महाराष्‍ट्र

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एलीफेंटा गुफाएं (180 56’ 20’’ उत्‍तर, 720 55’ 50’’ पूर्व) तालुक उरन, जिला रायगढ़, अपोलो बंदर, मुंबई से लगभग 11 किलोमीटर उत्‍तर-पूर्व की तटीय पहाडि़यों पर स्थित हैं और महाद्वीप से सात किलोमीटर की दूरी पर हैं तथा ये लगभग सात किलोमीटर के क्षेत्र में फैली हैं। इस द्वीप का नाम एक विशालकाय हाथी के नाम पर पड़ा जो इस द्वीप में पाया गया था। इस हाथी को घारापुरी के नाम से जाना जाता है। इस समय हाथी की मूर्ति को मुंबई में जीजामाता उद्यान में स्‍थापित किया गया है। प्राचीन काल में इसी स्‍थान को मुख्‍य रूप से पुरी के नाम से जाना जाता रहा है जिसका वर्णन पुलकेशिन-।। के ऐहोले अभिलेख में किया गया है। ऐसा लगता है कि विभिन्‍न राजवंशों ने इस द्वीप पर अपना आधिपत्य जमाया अर्थात् इस द्वीप को कोंकण-मौर्यों, त्रिकुटकों, बदामी के चालुक्यों शिलाहारों, राष्ट्रकूटों, कल्‍याणी चालुक्यों, देवगिरि के यादवों, अहमदाबाद के मुस्लिम शासकों और बाद में पुर्तगालियों द्वारा अपने आधिपत्य में रखा गया। मराठाओं का भी इस द्वीप पर आधिपत्‍य रहा और उनके बाद यह द्वीप ब्रिटिश शासन के हाथों में चला गया।

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एलीफेंटा समूह में सात गुफाओं की खुदाई की गई थी और इनका समय छठी-सातवीं सदी ईसवी के आस-पास माना जाता है। उत्‍खनित गुफाओं में से गुफा सं॰ 1 सबसे अधिक म‍हत्‍वपूर्ण है और यह विकसित ब्रा‍ह्मणी शैलकृत वास्‍तुकला का प्रतिनिधित्व करती है। यह गुफा उत्कृष्ट और प्रभावशाली मूर्तिशिल्प के लिए भी प्रसिद्ध है। वास्तुयोजना के अनुसार यह एलोरा की डुमर लेणा (गुफा सं॰ 29) जैसी ही दिखती है। इस गुफा का मुख्‍य प्रवेश द्वार उत्‍तर की तरफ है और दो अन्‍य प्रवेश द्वार पूर्व और पश्चि‍म की ओर हैं तथा एक केंद्रीय हाल है जिसमें स्तंभों की छह पंक्तियां हैं। लिंगम वेदिका वाले पश्चिमी किनारे को छोड़कर, प्रत्‍येक पंक्ति में छह-छह स्‍तंभ हैं।

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योजना के अनुसार, यहां तीन विशाल वर्गाकार आले हैं जो भित्ति स्‍तंभों द्वारा विभक्त हैं। प्रत्‍येक आले में द्वारपाल की विशाल आकृति है। पूर्व के पैनल पर एक शिव रूप- अर्धनारीश्‍वर की मूर्ति है जिसमें पुरूष एवं महिला का तेज संयोजित है। पश्चिम की ओर के चित्र में शिव और पार्वती को चौसर खेलते हुए उकेरा गया है। बीच के आले में इस काल की सबसे प्रसिद्ध और उल्लेखनीय मूर्ति है जो महेशमूर्ति के रूप में जानी जाती है। यह शिव के तीन रूपों अर्थात अघोर- विक्षुब्ध एवं भयानक; तत्‍पुरूष- हितैषी एवं विचार मग्‍न और वामदेव-सौम्‍य एवं दयाल की बृहदाकार आवक्ष मूर्ति है। इस मुख्‍य गुफा में अंधकासुरवध मूर्ति, नटराज मूर्ति, कल्‍याण सुंदर मूर्ति, गंगाधर मूर्ति, रावण द्वारा कैलाश को हिलाते हुए मूर्ति एवं लकुलिसा के रूप में शिव मूर्ति वाले अन्य उल्‍लेखनीय पैनल हैं। पूर्वी द्वार के निकट सप्तमात्रिका को चित्रित करने वाला पैनल भी उल्‍नेखनीय है।

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सुबह 9 बजे से शाम के 5 बजे तक खुला रहता है। सोमवार को बंद रहता है।

प्रवेश शुल्क: भारतीय नागरिक और सार्क देशों (बंगलादेश, नेपाल, भूटान, श्रीलंका, पाकिस्तान, मालदीव और अफगानिस्तान) और बिमस्टेक देशों (बंगलादेश, नेपाल, भूटान, श्रीलंका, थाईलेंड और म्यांमार) के पर्यटक 30/- रूपए प्रति व्यक्ति
अन्य: 500/- रूपए प्रति व्यक्ति

(15 वर्ष तक की आयु के बच्चों के लिए प्रवेश नि:शुल्क है)।

एलीफ़ेंटा गुफाएं
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