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अवंती स्वामी मंदिर, अवंतीपुर

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अवंतीपुर (33°55 अक्षांश उत्तर; 75°1′ देशांतर पूर्व) श्रीनगर के दक्षिण-पूर्व में 28 कि.मी. दूर अनंतनाग जिले में झेलम नदी के ऊपर स्थित है। इस नगर की स्थापना का श्रेय उत्पल वंश के पहले राजा, अवंती वर्मन (855-883 ईसवी) को दिया जाता है।

अवंतीपुर में स्वयं अवंती वर्मन ने दो भव्य मंदिरों की स्थापना की थी। एक भगवान विष्णु का मंदिर है जिसे अवंती स्वामी मंदिर कहते हैं और दूसरा भगवान शिव का मंदिर है जिसे अवंतीश्वर मंदिर कहते हैं। विष्णु मंदिर अपने राज्यारोहण से पहले बनवाया था और शिव मंदिर अधिराज्य प्राप्त करने के बाद बनवाया था। मध्यकाल में ये मंदिर ध्वस्त होकर खंडहरों में तबदील हो गए थे।

बीसवीं शताब्दी के प्रारंभ में डी.आर.साहनी द्वारा बड़े पैमाने पर किए गए उत्खनन कार्य में आंगन के फर्श से नीचे की ओर मंदिर के समस्त प्रांगण को उजागर किया और मध्य मंदिर के वर्तमान तहखाने और सहायक मंदिरों के अवशेषों प्राप्त किए। इस उत्खनन से बडी संख्या में पुरावशेष मिले जिनमें तोरमन, शाह मीरी वंश के सुल्तानों, दुर्रानी अफगान शासकों आदि द्वारा जारी किए गए 121 सिक्के भी शामिल हैं। साहनी ने अवंतीश्वर मंदिर के प्रांगण का भी उत्खनन किया जिसमें मिट्टी का एक छोटा जार मिला जिसमें विभिन्न राजाओं द्वारा जारी किए गए 108 तांबे के सिक्के, भुर्ज पाण्डुलिपियों के टुकड़े जिनमें पूजा की सामग्री का लेखा-जोखा था और उत्कीर्णित मिट्टी के जार आदि शामिल हैं।

मूल परिसर के विन्यास में एक बड़े आयताकार आंगन के मध्य भाग में बनाया गया एक मंदिर, मुख्य मंदिर के चारों कोनों पर चार छोटे मंदिर, आंगन की परिधि के चारों ओर व्यवस्थित कोठरियों सहित क्रमिक छतदार परिस्तंभ और शानदार दरवाजा शामिल है। मुख्य मंदिर की सीढि़यों के आगे खुले पार्श्व वाला स्तंभयुक्त मण्डप था संभवत: जिसमें गरूड़ध्वज लगा था। इस मंदिर पर पर्याप्त प्रभावशाली उत्कीर्णन हुआ है और उत्कृष्ट भव्य मूर्तियां बनी हुई हैं जो वास्तुशिल्प और कला का स्वर-संगम है।

स्मारक सूर्योदय से सूर्यास्त तक खुला है।

प्रवेश शुल्क:

भारतीय नागरिक और सार्क देशों (बंगलादेश, नेपाल, भूटान, श्रीलंका, पाकिस्तान, मालदीव और अफगानिस्तान) और बिमस्टेक देशों (बंगलादेश, नेपाल, भूटान, श्रीलंका, थाईलेंड और म्यांमार) के पर्यटक- 15/-रूपए प्रति व्यक्ति
अन्य- 2 अमरीकी डालर या 200/- रूपए प्रति व्यक्ति

(15 वर्ष तक की आयु के बच्चों के लिए प्रवेश नि:शुल्क है)।

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