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औरंगाबाद गुफाएं

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औरंगाबाद गुफाएं
औरंगाबाद, सिह्याचल और सतारा पर्वत माला के बीच दूधना नदी द्वारा सिंचित घाटी में स्थित है। औरंगाबाद का पुराना नाम खिड़की है जिसका अर्थ ‘खिड़की’ या ‘प्रवेश’ है। औरंगाबाद की गुफाएं (19° 55’ उत्तर, 75° 30’ पूर्व) लंबे समय तक अज्ञात रहीं। डाक्‍टर ब्रेडली ने सन् 1850 में निजाम सरकार को एक रिपोर्ट में इन गुफाओं की जानकारी दी। डाक्‍टर जेम्‍स बर्गीस ने सन् 1875-76 में पश्चिमी भारतीय पुराततव सर्वेक्षण की रिपोर्ट के खण्‍ड-।।। में विस्‍तार पूर्वक इन गुफाओं का वर्णन किया है।

ये गुफाएं भूतल से लगभग 70’ की ऊंचाई पर काटी गई थी। सिह्याचल पर्वत माला में इस पहाड़ी की शैल संरचना उत्खनन के लिए पूर्णत: उपयुक्‍त नहीं थी। इसलिए कई स्‍थानों पर चट्टानों की सतह ढह गई थीं और उनमें दरारें आ गई थीं। यही कारण था कि अनेक गुफाओं को अधूरा ही छोड़ दिया गया था। उत्खनन कर्ताओं ने भी खराब और धंसी चट्टानों का उत्खनन न करने में पर्याप्‍त सावधानी बरती।

कुल 12 बौद्ध गुफाएं (1 चैत्य गृह और 2 विहार) दक्‍कन बेसाल्‍ट रॉक ट्रैप में खोदी गई हैं जो तीन पृथक समूहों में आती हैं। पहले समूह में 1 से 5 गुफाएं आती हैं और दूसरे समूह में 6 से 9 गुफाएं आती हैं जो लगभग 500 मीटर की दूरी पर पहले समूह के पूर्व में स्थित हैं और तीसरे समूह में 10 से 12 गुफाएं आती हैं जो समतल और अधूरी छोड़ी गई कोठरियां हैं। ये भी आगे दूसरे समूह के पूर्व में 1 कि.मी. आगे स्थित हैं। इन गुफाओं का ज्ञात काल लगभग तीसरी शताब्‍दी से सातवीं शताब्‍दी है और ये अपने वास्‍तुशिल्‍प और मूर्ति शिल्‍प सौन्‍दर्य के लिए जानी जाती हैं। किन्हीं अभिज्ञेय विशेषताओं के न होने के कारण तीसरे समूह की गुफाओं के प्रवर्तकों और काल का निर्धारण करना कठिन है।

पहले समूह में से गुफा 4 प्रारंभिक चरण अर्थात हीनयान काल से संबंधित है। शेष गुफाएं महायान चरण से जुडी हैं। गुफा 4 एक चैत्‍यगृह है जिसके आगे का कुछ भाग तथा स्‍तम्‍भ ढह गए हैं और अब खंडहर ही बचे हैं। साक्ष्‍यों से पता चलता है कि यह एक आयताकार हॉल था जिसमें 17 स्‍तंभ बने थे जो उसे मध्‍य भाग और पार्श्‍व गलियारों में विभाजित करते थे। ये स्‍तंभ सपाट अष्टकोणीय हैं जिनमें से अधिकांश का अब पुन: निर्माण किया गया है। मध्‍य भाग की छत पर पत्‍थर की पटिट्यां, काष्‍ठ निर्मित पट्टियों जैसी दिखाई देती हैं। स्‍तूप को हॉल के पिछले भाग में रखा गया है जिसका एक ऊंचा बेलनाकार ड्रम, बल्बनुमा गुम्‍बद है जो एक साधारण रेलिंग सज्जा वाली हर्मिका द्वारा घिरा है जिस पर एक उल्टा सीढ़ीदार पिरामिड है। स्‍तूप के स्‍वरूप और आकार से चैत्‍य गृह के काल का पता चलता है जो तीसरी शताब्‍दी ईसवी से पहले का नहीं है।

पहले गुफा समूह की शेष गुफाओं में गुफा 4 जैसा कोई प्रारंभिक स्वरूप नहीं मिलता है। इस समूह में से सुदूर पश्‍चिम की गुफा एक अधूरी गुफा है जिसके केवल द्वारमण्‍डप और स्‍तंभ परिसज्जित हैं। इन्हें गढ़ा गया है और इनका अलंकरण अजंता के स्तंभों के समान लगता है। पद्मपाणी और वज्रपाणी के साथ महात्‍मा बुद्ध के चित्र वाले तीन फलक बरामदे में देखे जा सकते हैं। उपदेश की मुद्रा में सात बुद्धों की नक्काशी को भी देखा जा सकता है जिसमें पद्मपाणी और वज्रपाणी को उनके पार्श्‍व में बैठे दिखाया गया है।

गुफा-2 एक वर्गाकार मंदिर है जिसके चारों ओर प्रदक्षिणा पथ बना हुआ है। योजना के अनुसार यह उस काल के संरचनात्‍मक मंदिरों के समान लगता है जो शैलकृत गुफाओं के उदाहरणों से भिन्‍न है। इसमें एक वर्गाकार मंदिर, स्‍तंभावली और एक द्वारमंडप है। उपदेश देने की मुद्रा में बैठे हुए महात्‍मा बुद्ध की एक विशाल मूर्ति उस वेदिका पर रखी हुई है जिसके प्रवेश द्वार पर दूसरी ओर अवलोकितेश्‍वर सेवा की मुद्रा में बैठे हुए हैं। उन्‍होंने हाथ में कमल का फूल पकड़ा हुआ है जिस पर ध्‍यानी बुद्ध अमिताभ को दर्शाया गया है। मंदिर, द्वारमंडप और प्रदक्षिणापथ की दीवारों पर निचले फलकों में महात्‍मा बुद्ध की अनेक मूर्तियां देखी जा सकती हैं और उनमें से कुछ में वज्रपाणी और पद्मपाणी को उनकी सेवा में बैठे दिखाया गया है।
गुफा-2 के समान ही गुफा-5 है जिसमें प्रदक्षिणापथ के साथ-साथ एक वेदिका भी है। इस गुफा का अग्रभाग अब लुप्‍त है।

पहले गुफा समूह में गुफा-3 प्रमुख और सबसे बड़ी है। यह एक बहुत बड़ा मठ है और योजना के अनुसार यह अजंता की गुफाओं के समान है। योजना के अनुसार इसका स्‍तंभ युक्‍त बरामदा है जिसके दोनों सिरों पर कोठरियां बनी हैं। एक वर्गाकार स्तंभ वाला हॉल है जिसके दो तरफ दो कोठरियां है। एक स्‍तंभयुक्‍त द्वारमंडप है और एक वेदिका है। वर्गाकार हॉल के स्‍तंभ, वर्ग में व्यवस्थित हैं और उन पर फूल और ज्‍यामितीय डिजाइन उकेरे गए हैं। यह उत्‍कीर्णन स्‍तंभो के ऊपर प्रस्‍तरपाद पर भी देखा जा सकता है। एक उदाहरण में सुतसोमजातक को देखा जा सकता है।

दूसरा गुफा समूह पहले गुफा समूह के पूर्व में लगभग 500 मीटर की दूरी पर स्थित है और इसमें कई अधूरी गुफाएं देखने को मिलती हैं। चट्टान की प्रकृति और बनावट, गुफा के उत्खनन के लिए उपयुक्‍त नहीं रही होगी, इसलिए अनेक गुफाएं अधूरी पड़ी हुई हैं। इन गुफाओं में से गुफा-7 अपने प्रचुर मूर्तिशिल्‍प और विस्‍तृत चित्रण के लिए महत्‍वपूर्ण है। योजना के अनुसार इसका स्‍तंभयुक्‍त बरामदा है, प्रार्थना गृह में स्‍तंभ लगे हैं, इसके दायीं ओर स्थित प्रार्थना गृह में हरिति और पांचिक हैं और बायीं ओर के प्रार्थना गृह में छह देवियों की एक पंक्ति है जिसके बाएं पार्श्‍व पर पद्ममपाणि की मूर्ति है और दांयी ओर महात्‍मा बुद्ध की मूर्ति है। मध्‍य भाग में लगे दरवाजे से वर्गाकार हॉल में जाया जा सकता है और वेदिका तक परिक्रमा करके पहुंचा जाता है। मध्‍य दरवाजे के बायीं ओर से अग्नि, दस्यु, पोत-अवशेष, सिंह, सांप, हाथी और दानव के आठ बड़े संकटों से उद्धारक की भाव भंगिमा में अवलोकितेश्‍वर की मूर्ति का एक बड़ा भाग दिखाई देता है। मंदिर की दीवारों पर पर्याप्‍त और उत्‍कृष्‍ट उत्‍कीर्णन किया हुआ है जो औरंगाबाद गुफाओं का सर्वोत्‍कृष्‍ट नमूना है। उपदेश देने की मुद्रा में मध्‍य भाग में बैठे महात्‍मा बुद्ध की एक विशाल प्रतिमा है। मंदिर के प्रवेश द्वार पर पहरा देती एक मूर्ति खड़ी है। मध्‍य भाग में एक देवी की मूर्ति है जो संभवत: तारादेवी है और पार्श्‍व में स्त्रियों के चित्र बने हैं। मंदिर के किनारे वाली दीवारों पर दो और मनोहारी चित्र बने हुए हैं। संभवत: ऐसा लगता है कि दाईं ओर की दीवार पर अवलोकितेश्‍वर और तारा, दोनों के खड़ी हुई मुद्रा में चित्र बने हुए हैं जबकि बायीं ओर की दीवार पर बैठे हुए अलग-अलग संगीत यंत्र बजा रही छह महिला संगीतकारों के मध्‍य में नृत्‍य करती एक नृत्‍यांगना का खूबसूरत और भव्‍य चित्र बना हुआ है।

दूसरे गुफा समूह की गुफा-6 और गुफा-9 अन्‍य महत्‍वपूर्ण गुफाएं हैं। गुफा-6 में एक मंदिर बना हुआ है जिसमें स्‍तंभ लगा एक द्वारमण्‍डप और बरामदा है। बरामदे के दूसरी ओर कोठरियां बनी हैं। मध्‍य भाग में महात्‍मा बुद्ध की प्रतिमा वाले मंदिर के अतिरिक्‍त, दूसरी ओर बनी तीन कोठरियों को भी यहां से देखा जा सकता है। इन तीन कोठरियों में से दो में महात्‍मा बुद्ध की प्रतिमाएं हैं।

गुफा-9, तीन मंदिर परिसरों का एक समूह है जहां एक लंबे आयताकार बरामदे से होकर पहुंचा जाता है। महापरिनिर्वाण मुद्रा में महात्‍मा बुद्ध की प्रतिमा इस गुफा का महत्‍वपूर्ण पैनल है (अजंता गुफाओं की गुफा-26 के सदृश) जो बरामदे की बायीं दीवार पर है।

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